उर्दू शायरी · ग़ज़ल

badla hua duniya ka chalan dekh raha hun

बदला हुआ दुनिया का चलन देख रहा हूँ

بدلا ہوا دنیا کا چلن دیکھ رہا ہوں

शायर: Gauhar Shaikh Purwi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बदला हुआ दुनिया का चलन देख रहा हूँ
तहज़ीब के माथे पे शिकन देख रहा हूँ

तू ने जो गिरा लीं रुख़-ए-पुर-नूर पे ज़ुल्फ़ें
सूरज के भी चेहरे पे गहन देख रहा हूँ

वो मुझ से वफ़ाओं की सनद माँग रहे हैं
मैं जिन को यहाँ अहद-शिकन देख रहा हूँ

फूलों में न पहली सी वो ख़ुशबू है न वो रंग
भौँरों को गिरफ़्तार-ए-मेहन देख रहा हूँ

जिस अह्द में फ़नकार की इज़्ज़त नहीं बाक़ी
मैं आज वही दौर-ए-फ़ितन देख रहा हूँ

सहरा हो कि गुलज़ार गिरा देता है बिजली
क्या तौर तिरे चर्ख़-ए-कुहन देख रहा हूँ

अब रिंद भी ऐसे में बदल जाएँ तो बेहतर
बदला हुआ साक़ी का चलन देख रहा हूँ

अतवार ज़माने के अजब हो गए 'गौहर'
इस्मत की कलाई में रसन देख रहा हूँ