उर्दू शायरी · ग़ज़ल

duniya ki jo KHushi thi wo gham se badal gai

दुनिया की जो ख़ुशी थी वो ग़म से बदल गई

دنیا کی جو خوشی تھی وہ غم سے بدل گئی

शायर: Gauhar Shaikh Purwi10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दुनिया की जो ख़ुशी थी वो ग़म से बदल गई
शायद हयात इश्क़ के साँचे में ढल गई

दुनिया फिरी फिरी है तुम्हारी नज़र के साथ
तुम क्या बदल गए कि ख़ुदाई बदल गई

रुख़ बिजलियों ने मोड़ लिया सू-ए-आशियाँ
आई हुई बला मिरे गुलशन से टल गई

दी है किसी की याद ने दस्तक कुछ इस तरह
जैसे सबा क़रीब से आ कर निकल गई

मेरी ख़ुशी की बात का अब पूछना ही क्या
मेरी हर इक ख़ुशी तो तिरे ग़म में ढल गई

जिस शय को तुम ने देख लिया इल्तिफ़ात से
वो शय तुम्हारे हुस्न के साँचे में ढल गई

वो ख़ैरियत के वास्ते आएँगे घर मिरे
शायद इसी सबब से तबीअत सँभल गई

कितना क़वी जुनूँ का है रिश्ता बहार से
जब भी बहार आई तबीअत मचल गई

दुनिया को ख़ुश जो देखा तो मैं मुस्कुरा उठा
दुनिया ने जब ख़ुशी मिरी देखी तो जल गई

'गौहर' गिराँ है मेरी तबीअत पे कैफ़-ओ-रंग
हाँ देख कर ख़िज़ाँ को तबीअ'त बहल गई