उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dekh kar rang unki mahfil ka

देख कर रंग उन की महफ़िल का

دیکھ کر رنگ ان کی محفل کا

शायर: Gauhar Shaikh Purwi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

देख कर रंग उन की महफ़िल का
हो गया पस्त हौसला दिल का

खो गया जब ख़याल-ए-मंज़िल में
मिल गया है सुराग़ मंज़िल का

जब सितम सह के लोग हैं ख़ामोश
हौसला क्यों बढ़े न क़ातिल का

आप देखें न तेज़ नज़रों से
फूट जाएगा आबला दिल का

पूछते हैं वो हाल मैं चुप हूँ
आ गया है मक़ाम मुश्किल का

बैठ जाएँ जो दो क़दम चल कर
क्या निशाँ पा सकेंगे मंज़िल का

और इक वार की ज़रूरत है
ये तक़ाज़ा है तेरे बिस्मिल का

ग़म-ओ-हसरत की सख़्तियाँ तो बुरा
चूर है आइना मिरे दिल का

कोशिशें करके थक गया 'गौहर'
फिर भी रस्ता मिला न मंज़िल का