उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hai koi aur bhi jahan mein kya

है कोई और भी जहान में क्या

ہے کوئی اور بھی جہان میں کیا

शायर: Umar Farhat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

है कोई और भी जहान में क्या
मैं नहीं हूँ तिरे गुमान में क्या

तू ने फ़ितराक साथ तो रखा
तीर भी है तिरी कमान में क्या

एक साया था दिल में वो भी बुझा
रह गया है अब इस मकान में क्या

ज़ेर-ए-साया है और सभी दुनिया
हम नहीं हैं तिरी अमान में क्या

कोई भी तुझ से बात करता नहीं
ज़हर सा है तिरी ज़बान में क्या