उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hathon mein le ke zulf-e-girah-gir samne

हाथों में ले के ज़ुल्फ़-ए-गिरह-गीर सामने

ہاتھوں میں لے کے زلف گرہ گیر سامنے

शायर: Saadi Gilani5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हाथों में ले के ज़ुल्फ़-ए-गिरह-गीर सामने
आते हैं दिल को डालने ज़ंजीर सामने

बैठे हैं ले के हाथ में शमशीर सामने
इतनी हसीन मौत की तस्वीर सामने

क़ासिद ने जा के ख़त जो दिया मस्त-ए-नाज़ को
कर दी जला के राख ही तहरीर सामने

ठहरा तमाम 'उम्र जफ़ा-ख़ू वो संग-दिल
आई न मेरी आह की तासीर सामने

उस ने जला के शम' बुझा डाली फिर कहा
ये है तुम्हारे ख़्वाब की ता'बीर सामने