उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hath uske liye uThaen bhi

हाथ उस के लिए उठाएँ भी

ہاتھ اس کے لیے اٹھائیں بھی

शायर: Vibha Jain 'Khwaab'9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हाथ उस के लिए उठाएँ भी
पर नहीं काम की दु'आएँ भी

चाहते हैं किसी पे कुछ न खुले
और फ़ुर्क़त के गीत गाएँ भी

दुख भी बिरहन का बे-तहाशा है
बे-असर नींद की दवाएँ भी

कुछ तो अपना चराग़ मद्धम था
कुछ मुख़ालिफ़ रहीं हवाएँ भी

आइए फ़ुर्सतों के लम्हों में
कुछ सुनें दिल की कुछ सुनाएँ भी

पूछिए मत सबब उदासी का
हो कोई वजह तो बताएँ भी

एक नाज़ुक सा दिल मिला है हमें
जिस पे नाज़िल हैं सौ बलाएँ भी

ये निशानी है आख़िरी उस की
वर्ना दुख से नजात पाएँ भी

याद-ए-माज़ी अगर दे मोहलत तो
एक लम्हे को मुस्कुराएँ भी