उर्दू शायरी · ग़ज़ल

guftugu hai na ab koi izhaar

गुफ़्तुगू है न अब कोई इज़हार

گفتگو ہے نہ اب کوئی اظہار

शायर: Vikas Sharma Raaz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गुफ़्तुगू है न अब कोई इज़हार
फिर वही हम वही दर-ओ-दीवार

एक आसेब और बंदे चार
इस्म सब ने पढ़े सभी बेकार

सब्ज़े ने इस तरह से बदले रंग
खुल गए मुझ पे रुत के सब असरार

सुब्ह तक खींचते चले आए
हम ने तोड़ा न आँसुओं का तार

मा'ज़रत चाहते हैं शह-रग हम
हम से उठता नहीं लहू का भार

हम को कुछ और ही तवक़्क़ो' थी
इक ख़ला है फ़क़त बदन के पार

झील-रस्तों में कुछ भँवर भी हैं
ख़्वाब का रास्ता नहीं हमवार