उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghaTaon ne bahae ashk maiKHane bahut roe

घटाओं ने बहाए अश्क मयख़ाने बहुत रोए

گھٹاؤں نے بہائے اشک میخانے بہت روئے

शायर: Zafar Mirzapuri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

घटाओं ने बहाए अश्क मयख़ाने बहुत रोए
बिछड़ कर तेरे मय-ख़्वारों से पैमाने बहुत रोए

बहार आई थी उन की आबला-पाई से काँटों पर
हुए रुख़्सत तिरे वहशी तो वीराने बहुत रोए

वो अपने थे तो हँसते थे मिरी बर्बादी-ए-दिल पर
न-जाने क्यूँ वो मुझ से हो के बेगाने बहुत रोए

जो मोहलत दी कभी हम को ज़माने के हवादिस ने
तो कर के याद बीते दिन के अफ़्साने बहुत रोए

ज़माना जब था ग़म का उन के होंटों पर तबस्सुम था
मसर्रत की घड़ी आई तो दीवाने बहुत रोए

निज़ाम-ए-मयकदा बदला जो साक़ी तेरी नज़रों ने
तो मय-कश तोड़ कर ख़ुद अपने पैमाने बहुत रोए

न आया जिन को मर जाना भी जल कर शम' की लौ पर
'ज़फ़र' अपने मुक़द्दर पर वो परवाने बहुत रोए