उर्दू शायरी · ग़ज़ल

faza-e-sabr tari kar raha hun

फ़ज़ा-ए-सब्र तारी कर रहा हूँ

فضائے صبر طاری کر رہا ہوں

शायर: Vikas Sharma Raaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फ़ज़ा-ए-सब्र तारी कर रहा हूँ
मैं अपनी ग़म-गुसारी कर रहा हूँ

मैं लौट आया हूँ शहर-ए-ख़ामुशी से
सो बातें ख़ूब सारी कर रहा हूँ

दुकान-ए-जाँ की सज-धज पर न जाओ
ये कारोबार उधारी कर रहा हूँ

धनक में घोल कर अपनी उदासी
नया इक रंग जारी कर रहा हूँ

ख़िज़ाँ की भी पज़ीराई करूँगा
अभी जश्न-ए-बहारी कर रहा हूँ

बहुत से चाँद हैं अतराफ़ मेरे
तसव्वुर की सवारी कर रहा हूँ