उर्दू शायरी · ग़ज़ल

falak par chand jalta hai hum uske sath jalte hain

फ़लक पर चाँद जलता है हम उस के साथ जलते हैं

فلک پر چاند جلتا ہے ہم اس کے ساتھ جلتے ہیں

शायर: Vibha Jain 'Khwaab'5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फ़लक पर चाँद जलता है हम उस के साथ जलते हैं
किसी की याद में हम दोनों सारी रात जलते हैं

ग़ज़ल में आज-कल कह देते हैं उन से हम अपने ग़म
वगर्ना ख़ामुशी में घुट के हम चुप-ज़ात जलते हैं

हमें फिर याद आते हैं तुम्हारी आँख के सूरज
फिर ऐसी आग लगती है सर-ए-बरसात जलते हैं

छुआ था इक दफ़ा तुम ने हमें बातों ही बातों में
हमें छूता है अब कोई तो उस के हाथ जलते हैं

हमारी ही नज़र शायद लगी है इश्क़ को अपने
हम अपनी ख़ुश-नसीबी से भी बाज़-औक़ात जलते हैं