उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek dariya chhupa ke ghar rakhna

एक दरिया छुपा के घर रखना

ایک دریا چھپا کے گھر رکھنا

शायर: Nadeem Najid6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक दरिया छुपा के घर रखना
कितना मुश्किल है चश्म-ए-तर रखना

पहली सफ़ में खड़े हुए लोगो
आख़िरी शख़्स पर नज़र रखना

यार दीवार का तक़ाज़ा है
कुछ भी हो जाए इस में दर रखना

मुझ को इम्कान ने सिखा डाला
एक ताज़ा ख़राश कर रखना

अपने पहलू में तुम भी मिस्रा’-ए-'मीर'
ऐ मिरे ज़ौक़-ए-मो'तबर रखना

देख हैरत न फैल जाए कहीं
दश्त-आबाद पर नज़र रखना