उर्दू शायरी · ग़ज़ल

duniya walon ko tere KHwab jo aane lag jaen

दुनिया वालों को तिरे ख़्वाब जो आने लग जाएँ

دنیا والوں کو ترے خواب جو آنے لگ جائیں

शायर: Nadeem Najid5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दुनिया वालों को तिरे ख़्वाब जो आने लग जाएँ
शाम होते ही सभी ख़ुद को सुलाने लग जाएँ

क्या अंधेरा ही अंधेरा है ज़मीं के अंदर
क्या चराग़ों को तह-ए-ख़ाक दबाने लग जाएँ

काश इन 'इश्क़ के कत्बों पे हों कंदाँ हम लोग
काश इस 'इश्क़ में हम लोग ठिकाने लग जाएँ

अब भी मौक़ा' है मिरी मानिए दीवार के साथ
रात ये मुझ से कहा मेरी वफ़ा ने लग जाएँ

आयतों जैसे ख़द-ओ-ख़ाल को चिलमन ही में रख
ये न हो लोग तिरी क़स्में उठाने लग जाएँ