उर्दू शायरी · ग़ज़ल

din jawani ke na barbaad guzare hote

दिन जवानी के न बर्बाद गुज़ारे होते

دن جوانی کے نہ برباد گزارے ہوتے

शायर: Daniyal Haider Jafri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिन जवानी के न बर्बाद गुज़ारे होते
ऐ मिरी जान अगर आप हमारे होते

ला के रख देता तिरे सामने दुनिया सारी
चाँद हाथों पे तो क़दमों में सितारे होते

कौन मानेगा मोहब्बत का पयम्बर मैं हूँ
ऐ ख़ुदा मुझ पे सहीफ़े तो उतारे होते

तू मेरे दुख को समझता जो बिछड़ते तुझ से
लोग ऐसे जो तुझे जान से प्यारे होते

गर वो पूछें भी मिरी आख़िरी ख़्वाहिश तो कहूँ
क्या ही अच्छा था अगर आप हमारे होते

ग़म नहीं इस का कि हारी है ये बाज़ी हम ने
ग़म मगर ये है ज़रा लड़ के तो हारे होते

वस्ल की रुत भी हमें रास न आई 'हैदर'
काश इतने भी न गर्दिश में सितारे होते