उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil mein ehsas ki miTTi ho sab ka dukh zam karne ke liye

दिल में एहसास की मिट्टी हो सब का दुख ज़म करने के लिए

دل میں احساس کی مٹی ہو سب کا دکھ ضم کرنے کے لئے

शायर: Vikas Sharma Raaz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल में एहसास की मिट्टी हो सब का दुख ज़म करने के लिए
बन में जाना ही काफ़ी नहीं ख़ुद को गौतम करने के लिए

पहले ख़ुद पर कुछ तंज़ किए फिर ख़ूब हँसे फिर बैन किया
माहौल बनाया यूँ हम ने अपना मातम करने के लिए

मत आना इस के झाँसे में ये जंगल तो मायावी है
लौटे ही न अब तक वो आहू जो गए थे रम करने के लिए

रग-रग में लहू के दौरे की लय-ताल से गहरी निस्बत है
धुन एक मुसलसल बजती है रक़्स-ए-पैहम करने के लिए

दिल-दरिया की इन लहरों में हम शाम ढले ही तिरते हैं
कार-ए-शब से पहले ख़ुद को कुछ ताज़ा-दम करने के लिए

इस खेल में वापस आने को जाने कितने युग लगते हैं
पर एक जनम ही लगता है हस्ती को 'अदम करने के लिए

हम ऐसे भी नुक़्सान में थे हम ऐसे भी नुक़्सान में हैं
आँखें सहरा कर डाली हैं दिल-बंजर नम करने के लिए