उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dasht-e-tanhai se guzarne ka

दश्त-ए-तन्हाई से गुज़रने का

دشت تنہائی سے گزرنے کا

शायर: Vikas Sharma Raaz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दश्त-ए-तन्हाई से गुज़रने का
तज्रबा लिख रहा हूँ डरने का

उस की रफ़्तार से तो लगता है
वो कहीं भी नहीं ठहरने का

नींद टूटी तो मुझ को चैन पड़ा
ख़्वाब देखा था अपने मरने का

चख लिया है मुझे उदासी ने
ज़ख़्म-ए-शीरीं नहीं ये भरने का

तन से पत्थर बंधे हुए हैं मिरे
मैं नहीं सत्ह पर उभरने का