उर्दू शायरी · ग़ज़ल

darun-e-zat tabani nahin hai

दरून-ए-ज़ात ताबानी नहीं है

درون ذات تابانی نہیں ہے

शायर: Vikas Sharma Raaz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दरून-ए-ज़ात ताबानी नहीं है
कुआँ तो है मगर पानी नहीं है

सुपुर्द उस के हुए तो हम ने जाना
ये कार-ए-'इश्क़ नुक़सानी नहीं है

दुबारा हो रहा है ये तमाशा
सो अब आँखों में हैरानी नहीं है

बहुत से रंग हैं उस ख़ुश-सुख़न में
मगर इक रंग-ए-इम्कानी नहीं है

मिरी वहशत को है दरकार जितनी
यहाँ उतनी बयाबानी नहीं है

नहीं कुछ काम गोयाई का इस में
बदन-ख़्वानी ग़ज़ल-ख़्वानी नहीं है

चमेली की महक अच्छी है लेकिन
चमेली रात की रानी नहीं है