उर्दू शायरी · ग़ज़ल

darkar hai jaisa mujhe waisa nahin milta

दरकार है जैसा मुझे वैसा नहीं मिलता

درکار ہے جیسا مجھے ویسا نہیں ملتا

शायर: Balwan Singh Azar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दरकार है जैसा मुझे वैसा नहीं मिलता
मा'शूक़ मिरी ज़ात को सादा नहीं मिलता

अब चाहे किसी सम्त भी ले जाऊँ मैं ख़ुद को
इक रात ही मिलती है सवेरा नहीं मिलता

मरता है कई मौत वो इक मौत के डर से
बीमार को जब कोई मसीहा नहीं मिलता

इक भीड़ के बा'इस अभी तक दूर है मंज़िल
इक भीड़ के बा'इस मुझे रस्ता नहीं मिलता

रख देता हूँ आँखें मैं किसी ताक़ पे 'आज़र'
जब मेरे किसी ख़्वाब को ख़र्चा नहीं मिलता