उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chal rahe the nazar jamae hum

चल रहे थे नज़र जमाए हम

چل رہے تھے نظر جمائے ہم

शायर: Vikas Sharma Raaz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चल रहे थे नज़र जमाए हम
मुड़ के देखा तो लड़खड़ाए हम

खोलता ही नहीं कोई हम को
रह न जाएँ बंधे-बँधाए हम

प्यास की दौड़ में रहे अव्वल
छू के दरिया को लौट आए हम

एक ही बार लौ उठी हम से
एक ही बार जगमगाए हम

जिस्म भर छाँव की तमन्ना में
'उम्र भर धूप में नहाए हम