उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bhiD se dafatan tabhi thoDa pare hue the hum

भीड़ से दफ़'अतन तभी थोड़ा परे हुए थे हम

بھیڑ سے دفعتاً تبھی تھوڑا پرے ہوئے تھے ہم

शायर: Umair Najmi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

भीड़ से दफ़'अतन तभी थोड़ा परे हुए थे हम
देख के डर रहे थे सब इतना डरे हुए थे हम

सहल न थी शगुफ़्तगी दश्त-नुमा था बाग़ भी
जिस्म तमाम ज़ख़्मों से भर के हरे हुए थे हम

एक शब आँखों के शिगाफ़ खोल के सत्ह नीची की
घुटता था साँस सर तलक नम से भरे हुए थे हम

ले के सहारा भी अगर उठते तो बैठ जाता था
खुलता नहीं था दिल पे क्या बोझ धरे हुए थे हम

ओढ़ने और बिछाने को बस थीं सफ़ेद चादरें
सो के जब उठते लगता था जैसे मरे हुए थे हम