उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bas ek usi pe to puri tarah ayan hun main

बस इक उसी पे तो पूरी तरह 'अयाँ हूँ मैं

بس اک اسی پہ تو پوری طرح عیاں ہوں میں

शायर: Umair Najmi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बस इक उसी पे तो पूरी तरह 'अयाँ हूँ मैं
वो कह रहा है मुझे राएगाँ तो हाँ हूँ मैं

जिसे दिखाई दूँ मेरी तरफ़ इशारा करे
मुझे दिखाई नहीं दे रहा कहाँ हूँ मैं

किसी ने पूछा कि तुम कौन हो तो भूल गया
अभी किसी ने बताया तो था फुलाँ हूँ मैं

हर एक शख़्स को अपनी पड़ी हुई है यहाँ
मिरा ख़याल है अपनों के दरमियाँ हूँ मैं

मैं किस से पूछूँ ये रस्ता दुरुस्त है कि ग़लत
जहाँ से कोई गुज़रता नहीं वहाँ हूँ मैं

इधर उधर से नमी का रिसाव रहता है
सड़क से नीचे बनाया गया मकाँ हूँ मैं

जबीं पे हिज्र की तहरीर दर्ज करने में
किसी पुराने क़लम की तरह रवाँ हूँ मैं

किसी ज़बान की चुप के म'आनी जानना हैं
मुझे बताओ ख़मोशी का तर्जुमाँ हूँ मैं

मैं ख़ुद को तुझ से मिटाऊँगा एहतियात के साथ
तू बस निशान लगा दे जहाँ-जहाँ हूँ मैं