उर्दू शायरी · ग़ज़ल

barson purana dost mila jaise ghair ho

बरसों पुराना दोस्त मिला जैसे ग़ैर हो

برسوں پرانا دوست ملا جمنا جیسے غیر ہو

शायर: Umair Najmi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बरसों पुराना दोस्त मिला जैसे ग़ैर हो
देखा रुका झिझक के कहा तुम 'उमैर' हो

मिलते हैं मुश्किलों से यहाँ हम-ख़याल लोग
तेरे तमाम चाहने वालों की ख़ैर हो

कमरे में सिगरेटों का धुआँ और तिरी महक
जैसे शदीद धुँद में बाग़ों की सैर हो

इक हादिसा हो और अचानक उठाए जाएँ
जब भी हो इख़्तिताम हमारा ब-ख़ैर हो

हम मुतमइन बहुत हैं अगर ख़ुश नहीं भी हैं
तुम ख़ुश हो क्या हुआ जो हमारे बग़ैर हो

पैरों में उस के सर को धरें इल्तिजा करें
इक इल्तिजा कि जिसका न सर हो न पैर हो

कुछ तो हो दरमियान बिछड़ने के बा'द भी
कुछ भी भले क़लक़ हो शिकायत हो बैर हो