उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bahut kuchh aata hai lekin adakari nahin aati

बहुत कुछ आता है लेकिन अदाकारी नहीं आती

بہت کچھ آتا ہے لیکن اداکاری نہیں آتی

शायर: Balwan Singh Azar4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बहुत कुछ आता है लेकिन अदाकारी नहीं आती
कि सादा-लौह हैं हम हम को हुश्यारी नहीं आती

हमारी सम्त आ कर लौट जाते हैं सभी दरिया
हमारी प्यास को उन की तरफ़-दारी नहीं आती

लुटा देते हैं ख़ुद को दुनिया की झूटी मोहब्बत में
हमें आते हुए भी अब समझदारी नहीं आती

अगर देखे कोई तो कम नहीं है वुस'अतें इस की
हमारी आँख में क्यों रौशनी सारी नहीं आती