उर्दू शायरी · ग़ज़ल

agar sawar kai kashtiyon mein rahna hai

अगर सवार कई कश्तियों में रहना है

اگر سوار کئی کشتیوں میں رہنا ہے

शायर: Tahir Saood Kiratpuri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अगर सवार कई कश्तियों में रहना है
तो आँख आँख तुम्हें काजलों में रहना है

बस उन के मेरे ख़यालात में यहीं है तज़ाद
उन्हें नज़र में मुझे धड़कनों में रहना है

इस इक ख़याल ने ता-'उम्र बे-सुकून रखा
ख़याल ये था मुझे बादलों में रहना है

हमारे साथ तुम्हें 'उम्र-भर ब-शक्ल-ए-ग़ज़ल
कहीं रदीफ़ कहीं क़ाफ़ियों में रहना है

मैं चाहता हूँ यहाँ अम्न ही रहे क़ाएम
सो ऐ जुनून तुझे बंदिशों में रहना है

सलाहियत से ज़ियादा गुमान में रहना
इसी का नाम ग़लत-फ़हमियों में रहना है

मिरा नसीब अँगूठी नहीं है दौलत-मंद
मैं कोएला हूँ मुझे कोएलों में रहना है