उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ai mahw-e-raqs nach abhi aur nach aur

ऐ महव-ए-रक़्स नाच अभी और नाच और

اے محو رقص ناچ ابھی اور ناچ اور

शायर: Tahir Saood Kiratpuri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ऐ महव-ए-रक़्स नाच अभी और नाच और
इस सर-फिरी ज़मीन की हिम्मत को जाँच और

हम राह-ए-'इश्क़-ए-हक़ के मुसाफ़िर हैं सो हुज़ूर
काँटों के साथ डालिए कुछ काँच-वाँच और

ऐ बुलबुल-ए-असीर-ए-क़फ़स या'नी दर्द-ए-दिल
ज़ंजीर-ए-पा-ए-सब्र न तू खींच-खाँच और

फिर शाफ़े'-ए-ग़ज़ाल-ओ-ग़ज़ल पर मैं कुछ कहूँ
मिल जाएँ लफ़्ज़ ख़ूब अगर चार पाँच और

है मुफ़लिसी क़ुसूर तो मैं हूँ क़ुसूर-वार
दोज़ख़ बढ़ा सके तो बढ़ा अपनी आँच और

आँखों में आज दर्द की क़िल्लत है बेवफ़ा
फिर इन में आज डाल दे पिघला के काँच और

'ताहिर' ग़ज़ल को और अभी साफ़ कीजिए
मक्खन से कुछ निकालिए थोड़ी सी छाच और