उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil nahin toDa so dilbar ne baDa rahm kiya

दिल नहीं तोड़ा सो दिलबर ने बड़ा रहम किया

دل نہیں توڑا سو دلبر نے بڑا رحم کیا

शायर: Tahir Saood Kiratpuri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल नहीं तोड़ा सो दिलबर ने बड़ा रहम किया
अब के आईने पे पत्थर ने बड़ा रहम किया

मैं उसे भूल गया चाहे जहाँ भूल गया
मैं समझता हूँ मुक़द्दर ने बड़ा रहम किया

ज़ख़्म की अहल-ए-ज़माना को हवा लगने न दी
दोनों अफ़राद पे चादर ने बड़ा रहम किया

साँप ने अपने फ़राएज़ न फ़रामोश किए
उस को भी डस लिया जिस घर ने बड़ा रहम किया

हम तो बेकारी की वहशत से फ़ना हो जाते
हम से नाकारा पे दफ़्तर ने बड़ा रहम किया

भाई के वास्ते तूफ़ान से जी भर के लड़ा
इक समुंदर पे समुंदर ने बड़ा रहम किया

एक ही क़ब्र में दोनों को उतारा उस ने
'इश्क़ पर ये भी सितमगर ने बड़ा रहम किया