उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apne dushman ko bhi jo shaKHs dua deta hai

अपने दुश्मन को भी जो शख़्स दु'आ देता है

اپنے دشمن کو بھی جو شخص دعا دیتا ہے

शायर: Tahir Saood Kiratpuri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपने दुश्मन को भी जो शख़्स दु'आ देता है
तू उसे उस का नमक खा के दग़ा देता है

सात तालों में भी पहचान नहीं छुपती है
तेरा लहजा तिरे शजरे का पता देता है

ये रिवायत भी रिवायत ही हुई है साबित
'इश्क़ मा'शूक़ का हर 'ऐब छुपा देता है

कब कहाँ कौन सा किरदार अदा करना है
वक़्त ही वक़्त पे ये खेल सिखा देता है

कभी ख़ामोशी को ख़ामोश करा कर दिखलाए
शोर-ए-दरिया मिरी आवाज़ दबा देता है

यूँ तो पैसे की कोई ज़ात नहीं है लेकिन
एक रोते हुए बच्चे को हँसा देता है

ऐसा कुछ लोग भी करते हैं कई बार 'स'ऊद'
जैसे तेज़ाब दरख़्तों को सुखा देता है