नात लिरिक्स

Zamane Ke Har Ek Wali Ne Kaha Mujhe To Ali Chahiye

ज़माने के हर इक वली ने कहा मुझे तो अली चाहिए

नात ख़्वान: ग़ुलाम नूर-ए-मुजस्समशायर: ग़ुलाम नूर-ए-मुजस्समउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ज़माने के हर इक वली ने कहामुझे तो 'अली चाहिएजो हैं हर ज़माने के मुश्किल-कुशामुझे तो 'अली चाहिए

'अली का है ईमान बचपन से कामिलवो मेरा 'अली पंज-तन में है शामिलमिलेगा जहाँ से नबी का पतामुझे तो 'अली चाहिए

मैं सुन्नी हूँ, मुझ को ये निस्बत मिली हैनिगाहों में मेरे नजफ़ की गली हैमुबारक हो तुझ को तेरा रहनुमामुझे तो 'अली चाहिए

'अली की मोहब्बत है ईमाँ का हिस्सावहाँ काम आएगा मेरा भरोसाउठूँगा लहद से ये कहता हुआमुझे तो 'अली चाहिए

ये ज़िक्र-ए-'अली है, नहीं बंद होगामेरे बा'द सारा ज़माना कहेगाये मीसम ने सूली पे चढ़ कर कहामुझे तो 'अली चाहिए

वो कर्बल की वा'दी, वो शहर-ए-नजफ़ होकोई भी हो ख़ित्ता, किसी भी तरफ़ होजलाया है जिस ने दिए से दियामुझे तो 'अली चाहिए

बने जब मुहाजिर और अन्सार भाईनबी की निगाहें 'अली पर फिर आईंतो फ़रमाया भाई 'अली है मेरामुझे तो 'अली चाहिए

मिटा क्या सकेगा हमें ये ज़मानाहमारी तरफ़ है नबी का घरानाइस उम्मत पे है सय्यिदा की दु'आमुझे तो 'अली चाहिए

ख़ुदाया ! मेरा भी मुक़द्दर जगा देमुझे भी नजफ़ का मुसाफ़िर बना देन रोके ज़माना मेरा रास्तामुझे तो 'अली चाहिए

विलादत हुई जिन की का'बे के अंदरबताता है हम को ये ख़्वाजा का तेवरयही कह रहे हैं वो ख़्वाजा पियामुझे तो 'अली चाहिए

ये 'इज़्ज़त, ये शोहरत, ये दौलत, ये सरवतमिला है ये सब कुछ 'अली की बदौलतमेरे पास सब है 'अली का दियामुझे तो 'अली चाहिए

ऐ नूर-ए-मुजस्सम ! करो ज़िक्र-ए-हैदरमिलेंगे इसी रास्ते से पयम्बरहुसैनी जो होगा वो देगा सदामुझे तो 'अली चाहिए

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