नात लिरिक्स

Hamaari Itni Khataaon Par Bhi Nibha Rahe Hain Madine Waale

हमारी इतनी ख़ताओं पर भी निभा रहे हैं मदीने वाले

नात ख़्वान: ग़ुलाम नूर-ए-मुजस्समउपलब्ध: हिंदी

हमारी इतनी ख़ताओं पर भी निभा रहे हैं मदीने वालेगिरा रहे हैं ज़माने वाले, उठा रहे हैं मदीने वाले

मेरी हक़ीक़त, मेरी कहानी, बस इतनी है मेरी ज़िंदगानीख़ुदा ने पैदा किया है मुझ को, खिला रहे हैं मदीने वाले

जो नेक हैं उन को अपनी जानिब बुला रही है ख़ुदा की रहमतगुनाहगारों को अपनी जानिब बुला रहे हैं मदीने वाले

कोई है गोरा, कोई है काला, इसी में दुनिया फँसी हुई थीये फ़र्क़ दुनिया की ज़ेहनियत से मिटा रहे हैं मदीने वाले

हुसैन वो जिस को मुस्तफ़ा ने कहा था जन्नत का फूल है येवो फूल कर्ब-ओ-बला की ख़ातिर खिला रहे हैं मदीने वाले

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