हमारी इतनी ख़ताओं पर भी निभा रहे हैं मदीने वालेगिरा रहे हैं ज़माने वाले, उठा रहे हैं मदीने वाले
मेरी हक़ीक़त, मेरी कहानी, बस इतनी है मेरी ज़िंदगानीख़ुदा ने पैदा किया है मुझ को, खिला रहे हैं मदीने वाले
जो नेक हैं उन को अपनी जानिब बुला रही है ख़ुदा की रहमतगुनाहगारों को अपनी जानिब बुला रहे हैं मदीने वाले
कोई है गोरा, कोई है काला, इसी में दुनिया फँसी हुई थीये फ़र्क़ दुनिया की ज़ेहनियत से मिटा रहे हैं मदीने वाले
हुसैन वो जिस को मुस्तफ़ा ने कहा था जन्नत का फूल है येवो फूल कर्ब-ओ-बला की ख़ातिर खिला रहे हैं मदीने वाले
केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।