नात लिरिक्स

Aaqa Hamari Fikr Ko Kasa Ata Karen

आक़ा हमारी फ़िक्र को कासा अता करें

नात ख़्वान: ग़ुलाम नूर-ए-मुजस्समशायर: ग़ुलाम नूर-ए-मुजस्समउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

आक़ा ! हमारी फ़िक्र को कासा 'अता करेंआक़ा ! सदा ग़रीब है, लहजा 'अता करें

आक़ा ! शिकम की भूक ने अँधा बना दियाआक़ा ! दयार-ए-नूर का टुकड़ा 'अता करें

किस तरह रोज़-ए-हश्र उठाऊँगा अपना सरआक़ा ! गुनाहगार हूँ, पर्दा 'अता करें

नज़रें झुका के गुज़रूँ मवाजह शरीफ़ सेआक़ा ! गदा-ए-दर को सलीक़ा 'अता करें

आक़ा ! हमारी क़ौम से इंसाफ़ खो गयाआक़ा ! 'उमर के नाम का सदक़ा 'अता करें

ज़ुल्म-ओ-सितम के बा'द भी लब पर हो या नबीआक़ा ! बिलाल जैसा कलेजा 'अता करें

फिर से यज़ीदियत की हवा तेज़ हो गईआक़ा ! हुसैन जैसा सहारा 'अता करें

आक़ा ! हमारे बच्चें हों हसनैन के ग़ुलामबेटी कनीज़-ए-फ़ातिमा-ज़हरा 'अता करें

आक़ा ! जनाब-ए-अम्मी-ख़दीजा के नाम परआक़ा ! हमारी माओं को पर्दा 'अता करें

आक़ा ! 'अता हो दर्द-ए-मसीहाई आप काआक़ा ! निगाह मुर्दा है, जल्वा 'अता करें

मैं भी बहिश्त-ए-ख़ुल्द का नक़्शा बनाऊँगाआक़ा ! मुझे भी नक़्श-ए-कफ़-ए-पा 'अता करें

दो-चार अश्क बूँद से तस्कीन न मिलीआक़ा ! हमारी आँखों को दरिया 'अता करें

आक़ा ! बहुत सताया है दुनिया की चाह नेआक़ा ! हमारे 'इश्क़ को तयबा 'अता करें

आक़ा ! मिज़ाज-ए-नज्दी-वहाबी चढ़े है फिरकोई रज़ा के जैसा दीवाना 'अता करें

सर पे रखे हैं कितनों ने ना'लैन आप केआक़ा ! अब इस ग़ुलाम को मौक़ा' 'अता करें

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