नात लिरिक्स

Apne Darbar Ka Deedar Karaen Aaqa | Mujh Gunahgar Ko Tayba Mein Bulaen Aaqa

अपने दरबार का दीदार कराएँ आक़ा | मुझ गुनहगार को तयबा में बुलाएँ आक़ा

नात ख़्वान: ग़ुलाम नूर-ए-मुजस्समउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

अपने दरबार का दीदार कराएँ, आक़ा !मुझ गुनहगार को तयबा में बुलाएँ, आक़ा !

आप मुश्किल में गुनहगार के काम आते हैंआएँ आएँ मेरी इमदाद को आएँ, आक़ा !

सब ये कहते हैं, मुसलमान बहुत पीछे हैंअपनी ठोकर से हमें आगे बढ़ाएँ, आक़ा !

आप को छोड़ के कोई भी नहीं है अपनाअपने हालात कहाँ जा के सुनाएँ, आक़ा !

गर्मी-ए-हश्र में तस्कीन की साँसे लेगाअपने दामन से जिसे देंगे हवाएँ, आक़ा !

रब ने पैदा किया मुझ को भी उसी उम्मत मेंहाथ उठा कर जिसे देतें हैं दु'आएँ आक़ा

आप की फ़ातिमा ज़हरा का करम है वर्नासर पे बाक़ी नहीं रहतीं ये रिदाएँ, आक़ा !

आप के असग़र-ए-मासूम-सिफ़त के सदक़ेबख़्श दी जाती हैं मुजरिम की ख़ताएँ, आक़ा !

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