नात लिरिक्स

Soo-e-Taiba Ye Samajh Kar Hai Zamane Jate | Ye Wo Roza Hai Jahan Dil Nahin Tode Jate

सू-ए-तयबा ये समझ कर हैं ज़माने जाते | ये वो रौज़ा है जहाँ दिल नहीं तोड़े जाते

नात ख़्वान: असद रज़ा अत्तारीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सू-ए-तयबा ये समझ कर हैं ज़माने जातेये वो रौज़ा है जहाँ दिल नहीं तोड़े जाते

ये है आक़ा की 'इनायत, वो करम करते हैंवर्ना हम जैसे कहाँ दर पे बुलाए जाते

भूल जाते थे सहाबा ग़म-ओ-आलाम अपनेदेख लेते थे जो सरकार को आते जाते

रुत्बे सरकार के क्या ख़ल्क़ से जाने जातेसब पे असरार-ए-इलाही नहीं खोले जाते

नूर की हद में फ़क़त नूर ही जा सकता हैसिर्फ़ अगर होते बशर 'अर्श पे कैसे जाते ?

जिस्म के साथ उठाए गए जब कि 'ईसानूर-ए-कामिल क्यूँ न शब-ए-अस्रा बदन से जाते

चश्म-ए-बातिन से मदीने के नज़ारे देखोसिर्फ़ आँखों से ये मंज़र नहीं देखे जाते

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