नात लिरिक्स

Aaya Hai Bulawa Phir Ik Baar Madine Ka

आया है बुलावा फिर इक बार मदीने का

नात ख़्वान: असद रज़ा अत्तारीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

आया है बुलावा फिर इक बार मदीने काफिर जा के मैं देखूँगा दरबार मदीने का

गुलशन से हसीं-तर है कोहसार मदीने काबे-मिस्ल जहाँ में है गुलज़ार मदीने का

मैं फूल को चूमूँगा और धूल को चूमूँगाजिस वक़्त करूँगा मैं दीदार मदीने का

आँखों से लगा लूँगा और दिल में बसा लूँगासीने में उतारूँगा मैं ख़ार मदीने का

सीने में मदीना हो और दिल में मदीना होआँखों में भी हो नक़्शा, सरकार ! मदीने का

लाती है सर-ए-बालीं रहमत की अदा उन कोजिस वक़्त तड़पता है बीमार मदीने का

रोते हैं जो दीवाने, बेताब हैं मस्तानेउन सब को दिखा दीजे दरबार मदीने का

रोता है जो रातों को उम्मत की मोहब्बत मेंवो शाफ़े'-ए-महशर है सरदार मदीने का

रातों को जो रोता है और ख़ाक पे सोता हैग़म-ख़्वार है, सादा है मुख़्तार मदीने का

क़ब्ज़े में दो 'आलम हैं, पर हाथ का तकिया हैसोता है चटाई पर सरदार मदीने का

दुख-दर्द जहाँ भर के, सब दूर, शहा ! कर केमुझ को तो बना लीजे बीमार मदीने का

इस दर के भिकारी की झोली में दो 'आलम हैंशाहों से भी बढ़ कर है नादार मदीने का

मक़बूल जहाँ भर में हो दा'वत-ए-इस्लामीसदक़ा तुझे, ऐ रब्ब-ए-ग़फ़्फ़ार ! मदीने का

तक़दीर चमक उट्ठे, क़िस्मत ही तो खुल जाएबन जाए जो अदना सग 'अत्तार मदीने का

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