नात लिरिक्स

Aah Ramzan Ab Ja Raha Hai | Haye Tarpa Ke Ramzan Chala Hai

आह रमज़ान अब जा रहा है | हाए तड़पा के रमज़ाँ चला है

नात ख़्वान: मेहमूद अत्तारीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

आह ! रमज़ान अब जा रहा हैहाए ! तड़पा के रमज़ाँ चला हैटुकड़े टुकड़े मेरा दिल हुआ हैहाए ! तड़पा के रमज़ाँ चला है

देख कर चाँद मैं रो पड़ा थासामने हिज्र का ग़म खड़ा थाजल्द रुख़्सत का वक़्त आ गया हैहाए ! तड़पा के रमज़ाँ चला है

अश्क़ आँखों से अब बह रहे हैंहिज्र का ग़म जो हम सह रहे हैंवो दिल-ए-ग़मज़दा जानता हैहाए ! तड़पा के रमज़ाँ चला है

ग़म जुदाई का कैसे सहूँगाकिस से ग़म का फ़साना कहूँगाआँख पुर-नम है, दिल रो रहा हैहाए ! तड़पा के रमज़ाँ चला है

जाँ फ़िदा तुझ पे, नाना-ए-हसनैन !क़ल्ब है ग़म-ज़दा और बेचैनदिल पे सदमा बढ़ा जा रहा हैहाए ! तड़पा के रमज़ाँ चला है

तू ये करना ख़ुदा से सिफ़ारिशइस गुनहगार की कर दे बख़्शिशतुझ से 'अत्तार की इल्तिजा हैहाए ! तड़पा के रमज़ाँ चला है

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।