नात लिरिक्स

Aaj Tayba Ka Hai Safar Aaqa

आज तयबा का है सफ़र आक़ा

नात ख़्वान: अब्दुल मलिक अत्तारीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

आज तयबा का है सफ़र, आक़ा !दे दो तोशे में चश्म-ए-तर, आक़ा !

ग़म-ज़दा हूँ मैं किस क़दर, आक़ा !तुम को मेरी है सब ख़बर, आक़ा !

ताज-ए-शाही का मैं नहीं तालिबकर दो रहमत की इक नज़र, आक़ा !

तेरी उल्फ़त का मैं भिकारी हूँमेरा कश्कोल जाए भर, आक़ा !

चल मदीना का वो भी लें मुज़्दाजिन के पल्ले नहीं है ज़र, आक़ा !

इस तरह से छुपा लो दामन मेंन 'अदू की पड़े नज़र, आक़ा !

फँस गया हूँ गुनह के दलदल मेंहो करम, शाह-ए-बहर-ओ-बर आक़ा !

वासिता मेरे ग़ौस-ए-आ'ज़म काहर ख़ता कर दो दर-गुज़र, आक़ा !

तुम उसे भी गले लगाते होजिस को धुत्कारे हर बशर, आक़ा !

मौला मुश्किल-कुशा के सदक़े मेंइस्तिक़ामत दो दीन पर, आक़ा !

काश ! इस शान से ये दम निकलेतेरी दहलीज़ पर हो सर, आक़ा !

इज़्न दे दो बक़ी'-ए-ग़रक़द कातेरे जल्वों में जाऊँ मर, आक़ा !

मौत 'अत्तार को मदीने मेंआए अब तो न जाए घर, आक़ा !

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