नात लिरिक्स

Aisa Lagta Hai Madine Jald Wo Bulwaaenge

ऐसा लगता है मदीने जल्द वो बुलवाएँगे

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ऐसा लगता है मदीने जल्द वो बुलवाएँगेजाएँगे जा कर उन्हें ज़ख़्म-ए-जिगर दिखलाएँगे

वो अगर चाहेंगे तो ऐसी नज़र फ़रमाएँगेख़ूब रोएँगे, पछाड़ों पर पछाड़ें खाएँगे

ख़ुश्क अश्क-ए-'इश्क़ से आँखें हैं, दिल भी सख़्त हैआप ही चाहेंगे तो, आक़ा ! हमें तड़पाएँगे

मौत अब तो गुंबद-ए-ख़ज़रा के साए में मिलेकब तक, आक़ा ! दर-ब-दर की ठोकरें हम खाएँगे

ए ख़ुशा ! तक़दीर से गर हम को मंज़ूरी मिलीरख के सर दहलीज़ पर सरकार की मर जाएँगे

रोते रोते गिर पड़ेंगे उन के क़दमों में वहाँरोज़-ए-महशर शाफ़े'-ए-महशर नज़र जब आएँगे

ख़ुल्द में होगा हमारा दाख़िला इस शान सेया रसूलल्लाह का ना'रा लगाते जाएँगे

हश्र में कैसे संभालूँगा मैं अपने आप कोआ मेरे, 'अत्तार ! आ, वो जब वहाँ फ़रमाएँगे

हाए ! अब की बार भी, 'अत्तार ! जो ज़िंदा बचेफिर मदीने से कराची रोते रोते आएँगे

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