नात लिरिक्स

Aakhri Roze Hain Dil Ghamnak Muztar Jaan Hai

आख़री रोज़े हैं दिल ग़मनाक मुज़्तर जान है

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

आख़िरी रोज़े हैं दिल ग़मनाक मुज़्तर जान हैहसरता वा-हसरता अब चल दिया रमज़ान है

'आशिक़ान-ए-माह-ए-रमज़ाँ रो रहे हैं फूट करदिल बड़ा बेचैन है, अफ़्सुर्दा रूह-ओ-जान है

दर्द-ओ-रिक़्क़त से पछाड़ें खा के रोता है कोईतो कोई तस्वीर-ए-ग़म बन कर खड़ा हैरान है

अल-फ़िराक़ आह अल-फ़िराक़, ऐ रब के मेहमाँ ! अल-फ़िराक़अल-वदा' अब चल दिया तू, ऐ मह-ए-रमज़ान ! है

दास्तान-ए-ग़म सुनाएँ किस को जा कर आह ! हमया रसूलल्लाह ! देखो चल दिया रमज़ान है

ख़ूब रोता है, तड़पता है ग़म-ए-रमज़ान मेंजो मुसलमाँ क़द्र-दान-ओ-'आशिक़-ए-रमज़ान है

रोते रोते हिचकियाँ बँध जाती हैं 'उश्शाक़ कीतुझ में कैसा सोज़, ऐ अल्लाह के मेहमान ! है

तेरी फ़ुर्क़त में तेरे 'आशिक़ का दिल टुकड़े हुआऔर सीना चाक तेरे हिज्र में, रमज़ान ! है

वक़्त-ए-इफ़्तार-ओ-सहर की रौनक़ें होंगी कहाँ !चंद दिन के बा'द ये सारा समाँ सुनसान है

तेरी आमद से दिल-ए-पज़मुर्दा खिल उट्ठे मगरजल्द तड़पा कर हमें तू चल दिया, रमज़ान ! है

हाए सद अफ़्सोस ! रमज़ाँ की न हम ने क़द्र कीबे-सबब ही बख़्श दे, या रब ! की तू रहमान है

माह-ए-रमज़ाँ ! तुझ में जो रोज़े नहीं रखता कोईवो बड़ा महरूम है, बद-बख़्त है, नादान है

कर रहे हैं तुझ को रो रो कर मुसलमाँ अल-वदा'आह ! अब तू चंद घड़ियों का फ़क़त मेहमान है

रोक सकते ही नहीं हाए तुझे अब क्या करें !सब को रोता छोड़ कर तू चल दिया, रमज़ान ! है

अस्सलाम, ऐ माह-ए-रमज़ाँ ! तुझ पे हों लाखों सलामहिज्र में अब तेरा हर 'आशिक़ हुआ बे-जान है

चंद आँसू नज़्र हैं बस और कुछ पल्ले नहींनेकियों से आह ! ये ख़ाली मेरा दामान है

वासिता रमज़ान का, या रब ! हमें तू बख़्श देनेकियों का अपने पल्ले कुछ नहीं सामान है

दस्त-बस्ता इल्तिजा है, हम से राज़ी हो के जाबख़्शवाना हश्र में, हाँ तू मह-ए-ग़ुफ़रान है

काश ! आते साल हो 'अत्तार को रमज़ाँ नसीबया नबी ! मीठे मदीने में, बड़ा अरमान है

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