नात लिरिक्स

Afsos Bahut Door Hun Gulzar-e-Nabi Se

अफ़सोस बहुत दूर हूँ गुलज़ार-ए-नबी से

नात ख़्वान: आरिफ़ अत्तारीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

अफ़सोस ! बहुत दूर हूँ गुलज़ार-ए-नबी सेकाश ! आए बुलावा मुझे दरबार-ए-नबी से

उल्फ़त है मुझे गेसू-ए-ख़मदार-ए-नबी सेअब्रू-ओ-पलक, आँख से, रुख़्सार-ए-नबी से

बूसैरी ! मुबारक हो तुम्हें बुर्द-ए-यमानीसौग़ात मिली ख़ूब है दरबार-ए-नबी से

बीमार ! न मायूस हो, तू हुस्न-ए-यक़ीं रखदम जा के करा ले किसी बीमार-ए-नबी से

ए ज़ाइर-ए-तयबा ! ये दु'आ कर मेरे हक़ मेंमुझ को भी बुलावा मिले दरबार-ए-नबी से

दीवानों के आँसू नहीं थमते दम-ए-रुख़्सतजब सू-ए-वतन जाते हैं दरबार-ए-नबी से

जल्वों से, ख़ुदाया ! मेरा सीना हो मदीनाआँखें भी हों ठंडी मेरी दीदार-ए-नबी से

मस्ताना मदीने में, ख़ुदा ! ऐसा बना देटकरा के मैं दम तोड़ दूँ दीवार-ए-नबी से

जब क़ब्र में आएँगे तो क़दमों में गिरूँगाख़ूब आँखें मलूँगा मैं तो पैज़ार-ए-नबी से

'अत्तार है ईमाँ की हिफ़ाज़त का सुवालीख़ाली नहीं जाएगा ये दरबार-ए-नबी से

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