आक़ा ने बुलाया रौज़े पर, कुछ याद रहा कुछ भूल गयाकी 'अर्ज़-ए-तमन्ना रो रो कर, कुछ याद रहा कुछ भूल गया
बख़्शिश की तलब के जितने भी मज़मून थे सारे अज़-बर थेगुंबद पे पड़ी जब मेरी नज़र, कुछ याद रहा कुछ भूल गया
बातें तो बहुत सी करनी थीं, हर ग़म का मदावा करना थाथीं मेरी निगाहें जाली पर, कुछ याद रहा कुछ भूल गया
मैं बारगह-ए-हम्ज़ा में गया, कि उन से सिफ़ारिश करवाऊँथीं उन की निगाहें जब मुझ पर, कुछ याद रहा कुछ भूल गया
कुछ 'अर्ज़ शहा से करना थी, कुछ नज़्र वहाँ पे करना थीदरबार-ए-नबी का था वो असर, कुछ याद रहा कुछ भूल गया
जन्नत की कियारी भी देखी, मिम्बर का नज़ारा ख़ूब कियाजाली पे हुज़ूरी का मंज़र, कुछ याद रहा कुछ भूल गया
अश्कों की लड़ी थी चेहरे पर, अल्फ़ाज़ की माला थी लब परमोती जो लुटाए जी भर कर, कुछ याद रहा कुछ भूल गया
आक़ा से शफ़ा'अत जब माँगी, शैख़ैन से भी कुछ 'अर्ज़ कियाथे दोनों वहाँ सिद्दीक़-ओ-'उमर, कुछ याद रहा कुछ भूल गया
क़दमैन से पहुँचा जाली पर, रहमत के दरीचे खुलते गएथा मेरा मुक़द्दर ज़ोरों पर, कुछ याद रहा कुछ भूल गया
फिर इतना दिया आक़ा ने मुझे, औक़ात से मेरी बढ़ बढ़ करगिनता ही रहा मैं चुन चुन कर, कुछ याद रहा कुछ भूल गया
हाफ़िज़ है नबी का दीवाना, सर को जो लगाया चौखट सेफिर ख़ूब ही माँगा रो रो कर, कुछ याद रहा कुछ भूल गया
aaqa ne bulaaya rauze parkuchh yaad raha kuchh bhool gayaki 'arz-e-tamanna ro ro karkuchh yaad raha kuchh bhool gaya
baKHshish ki talab ke jitne bhi -mazmoon the saare az-bar thegumbad pe pa.Di jab meri nazarkuchh yaad raha kuchh bhool gaya
kuchh 'arz shaha se karna thikuchh nazr wahaa.n pe karna thidarbaar-e-nabi ka tha wo asarkuchh yaad raha kuchh bhool gaya
jannat ki kiyaari bhi dekhimimbar ka nazaara KHoob kiyajaali pe huzoori ka manzarkuchh yaad raha kuchh bhool gaya
ashko.n ki la.Di thi chehre paralfaaz ki maala thi lab parmoti jo luTaae jee bhar karkuchh yaad raha kuchh bhool gaya
aaqa se shafaa'at jab maangishaiKHain se bhi kuchh 'arz kiyathe dono.n wahaa.n siddiq-o-'umarkuchh yaad raha kuchh bhool gaya
qadmain se pahuncha jaali parrahmat ke dareeche khulte gayetha mera muqaddar zoro.n parkuchh yaad raha kuchh bhool gaya
phir itna diya aaqa ne mujheauqaat se meri ba.Dh ba.Dh karginta hi raha mai.n chun chun karkuchh yaad raha kuchh bhool gaya
Haafiz hai nabi ka deewanasar ko jo lagaaya chaukhaT sephir KHoob hi maanga ro ro karkuchh yaad raha kuchh bhool gaya
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