नात लिरिक्स

Basti Wo Bataaun Kaisi Hai, Jise Log Madina Kehte Hain

बस्ती वो बताऊँ कैसी है, जिसे लोग मदीना कहते हैं

नात ख़्वान: असद रज़ा अत्तारीशायर: अहमद रज़ा फ़हर क़ादरी - अर्फ़क़उपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

बस्ती वो बताऊँ कैसी है, जिसे लोग मदीना कहते हैंइक रहमत-ओ-नूर की धरती है, जिसे लोग मदीना कहते हैं

बस्ती वो बताऊँ कैसी है, जिसे लोग मदीना कहते हैं

जाते हैं सवाली की सूरत, आते हैं ग़ज़ाली की सूरतख़ैरात वहाँ ये बटती है, जिसे लोग मदीना कहते हैं

बस्ती वो बताऊँ कैसी है, जिसे लोग मदीना कहते हैं

दुनिया-ओ-दीं का भला माँगो या इस से भी बढ़ के दु'आ माँगोमक़बूल वहाँ हर अर्ज़ी है, जिसे लोग मदीना कहते हैं

बस्ती वो बताऊँ कैसी है, जिसे लोग मदीना कहते हैं

अपने तो हैं अपने ग़ैरों को और दुनिया भर के मरीज़ों कोइक्सीर वहाँ की मिट्टी है, जिसे लोग मदीना कहते हैं

बस्ती वो बताऊँ कैसी है, जिसे लोग मदीना कहते हैं

क्यूँ-कर न मु'अत्तर हो आख़िर, ए बाद-ए-सबा ! तेरा दामनबू तू भी वहीं से लाती है, जिसे लोग मदीना कहते हैं

बस्ती वो बताऊँ कैसी है, जिसे लोग मदीना कहते हैं

आँखों में चमक आ जाती है, दिल की धड़कन बढ़ जाती हैक्या मर्कज़-ए-कैफ़-ओ-मस्ती है, जिसे लोग मदीना कहते हैं

बस्ती वो बताऊँ कैसी है, जिसे लोग मदीना कहते हैं

पूछा जो गया, मजबूरों की दिल-जूई का मर्कज़ भी है कोई ?अर्फ़क़ ने पुकारा, हाँ जी है, जिसे लोग मदीना कहते हैं

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