नात लिरिक्स

Aankhon Ko Wo Pur Kaif Nazare Nahin Bhoole

आँखों को वो पुर-कैफ़ नज़ारे नहीं भूले

नात ख़्वान: असद रज़ा अत्तारीशायर: सुहैल कलीम फ़ारूक़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

आँखों को वो पुर-कैफ़ नज़ारे नहीं भूलेवो दिन जो मदीने में गुज़ारे नहीं भूले

फिर कीजे करम, या नबी ! हसनैन का सदक़ाशहर आप का ये दर्द के मारे नहीं भूले

बेचैन है, इक बार उठे फिर वही उँगलीमहताब को आक़ा के इशारे नहीं भूले

गिर जाऊँ मैं जी चाहे मेरा फिर से भँवर मेंआक़ा ने दिए थे जो सहारे नहीं भूले

इस्लाम के गुलशन को बचाया था जिन्हों नेकर्बल को वो ज़हरा के दुलारे नहीं भूले

तयबा की हसीं रात में, फ़ारूक़ी ! हमारीतक़दीर के चमके जो सितारे नहीं भूले

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