नात लिरिक्स

Ye Shehr-e-Mustafa Hai Madina Kareem Hai

ये शहर-ए-मुस्तफ़ा है मदीना करीम है

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरीशायर: अल्लामा निसार अली उजागरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ये शहर-ए-मुस्तफ़ा है, मदीना करीम हैसब को निभा रहा है, मदीना करीम है

क्यूँ ना करीम हो ये कि आक़ा करीम कामस्कन जो बन गया है, मदीना करीम है

फैला के अपनी बाँहें बुलाता है बार-बाररहमत का दायरा है, मदीना करीम है

टुकड़ों पे उन के पलते हैं शाह-ओ-गदा सभीसुफ़रा लगा हुवा है, मदीना करीम है

लब खोलने से पहले ही आक़ा ने दे दियामेरा भी तजरिबा है, मदीना करीम है

लंदन, दुबई-ओ-सिडनी, पैरिस नहीं नहींदिल जिस पे मर मिटा है, मदीना करीम है

है ज़र्फ़ ला-जवाब, करम बे-मिसाल हैमुझ जैसा आ गया है, मदीना करीम है

जन्नत भी मुझ को आप के क़दमों में मिल गईकैसा करम हुवा है, मदीना करीम है

क्या माँगूँ मुस्तफ़ा से, उजागर ! दिली-मुरादसब कुछ तो दे दिया है, मदीना करीम है

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