ग़फ़लत में कटी मोरी सकरी उमरियाकरो मो पे अपनी दया ग़ौस-ए-आज़म
आऊं तेरे दर पर जीलानी, आऊं तेरे दर पर जीलानीआऊं तेरे दर पर जीलानी, आऊं तेरे दर पर जीलानी
मुझ पर भी करम हो जीलानी, मुझ पर भी करम हो जीलानी
आऊं तेरे दर पर जीलानी, आऊं तेरे दर पर जीलानीआऊं तेरे दर पर जीलानी, आऊं तेरे दर पर जीलानी
ज़माने में नहीं सुनता कोई फ़रियाद जीलानीख़ुदारा आप ही कीजे मेरी इमदाद जीलानी
आऊं तेरे दर पर जीलानी, आऊं तेरे दर पर जीलानीआऊं तेरे दर पर जीलानी, आऊं तेरे दर पर जीलानी
करो इमदाद ऐ लख्ते-दिले-मुश्क़िल-कुशा-हैदरगिरा हूँ ग़र्दिशों में, हूँ बड़ा नाशाद जीलानी
आऊं तेरे दर पर जीलानी, आऊं तेरे दर पर जीलानीआऊं तेरे दर पर जीलानी, आऊं तेरे दर पर जीलानी
फ़साने ग़म के तुम से ना कहूं तो फिर कहूं किस सेमेरी सुन लो मेरी सुन लो मेरी रूदाद जीलानी
आऊं तेरे दर पर जीलानी, आऊं तेरे दर पर जीलानीआऊं तेरे दर पर जीलानी, आऊं तेरे दर पर जीलानी
मेरी शाम-ए-ख़ज़ाँ सुब्हे-बहारा में बदल जाएरुखे-पुरनूर दिखला कर करो तुम शाद जीलानी
आऊं तेरे दर पर जीलानी, आऊं तेरे दर पर जीलानीआऊं तेरे दर पर जीलानी, आऊं तेरे दर पर जीलानी
समंदर में ग़मों के पाएगा ये साहिल-ए-तस्कीनउजागर देख ले आ कर तेरा बग़दाद जीलानी
आऊं तेरे दर पर जीलानी, आऊं तेरे दर पर जीलानीआऊं तेरे दर पर जीलानी, आऊं तेरे दर पर जीलानी
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