नात लिरिक्स

Aaya Nabi Ka Jashn-e-Wiladat Pandra Sau Sala Jash-e-Wiladat

आया नबी का जश्न-ए-विलादत पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत

नात ख़्वान: सय्यिद हस्सानुल्लाह हुसैनीशायर: अल्लामा निसार अली उजागरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मेरे सरकार आए ! मेरे दिलदार आए !नबियों के सरदार आए !ताजदार-ए-ख़त्म-ए-नबुव्वत आए !

आया नबी का जश्न-ए-विलादत, पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादतबारहवीं का दिन बा'इस-ए-रहमत, पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत

आया नबी का जश्न-ए-विलादत, पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत

एक ख़ुदा का नाम ज़बाँ पर आते ही सज्दा उस को किया हैहोंटों पे जारी नग़्मा-ए-वहदत, पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत

आया नबी का जश्न-ए-विलादत, पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत

धूम मची चारों तरफ़ ! मरहबा मरहबा !शादी रची चारों तरफ़ ! मरहबा मरहबा !कलियाँ खिलीं चारों तरफ़ ! मरहबा मरहबा !महकी फ़ज़ा चारों तरफ़ ! मरहबा मरहबा !भीनी हवा चारों तरफ़ ! मरहबा मरहबा !ज़िक्र-ए-नबी चारों तरफ़ ! मरहबा मरहबा !जश्न-ए-नबी चारों तरफ़ ! मरहबा मरहबा !

ना'त की महफ़िल घर में सजाओ, उन की सना के फूल खिलाओज़िक्र-ए-नबी से पाओगे रहमत, पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत

आया नबी का जश्न-ए-विलादत, पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत

जश्न-ए-विलादत अपना 'अक़ीदा, जैसी हो मुश्किल छोड़ेंगे ना हमसुन ले ज़माना मेरी वसिय्यत, पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत

आया नबी का जश्न-ए-विलादत, पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत

'इश्क़-ए-नबी में मस्त हुए हैं, जान भी देंगे माल भी देंगे'इश्क़ है ईमाँ 'इश्क़ ज़रूरत, पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत

आया नबी का जश्न-ए-विलादत, पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत

रहमतों वाला बरकतों वाला, दर्द दिलों के बाँटने वालाआया नबी वो क़ासिम-ए-ने'मत, पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत

आया नबी का जश्न-ए-विलादत, पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत

सजते हैं परचम घर में गली में, धूम है हर दम सारे जहाँ मेंलब पे हैं ना'रे दिल में 'अक़ीदत, पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत

आया नबी का जश्न-ए-विलादत, पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत

जोश-ओ-जुनूँ है, कितना सुकूँ है, जश्न-ए-नबी से 'इश्क़ फ़ुज़ूँ हैउन के करम से मिलती है 'इज़्ज़त, पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत

आया नबी का जश्न-ए-विलादत, पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत

सरकार की आमद ! मरहबा !दिलदार की आमद ! मरहबा !आक़ा की आमद ! मरहबा !मक्की की आमद ! मरहबा !मदनी की आमद ! मरहबा !लजपाल की आमद ! मरहबा !सरदार की आमद ! मरहबा !मनठार की आमद ! मरहबा !

सारे जहाँ में, 'अरब-ओ-'अजम में, जश्न-ए-नबी की धूम मची हैफैली है ख़ुशियाँ चमकी है रंगत, पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत

आया नबी का जश्न-ए-विलादत, पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत

लफ़्ज़ों के मोती, 'इश्क़ का गजरा, तोहफ़ा उजागर ! ख़ूब मिला हैना'त-ए-नबी है उन की 'इनायत, पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत

आया नबी का जश्न-ए-विलादत, पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत

धूम मची चारों तरफ़ ! मरहबा मरहबा !शादी रची चारों तरफ़ ! मरहबा मरहबा !कलियाँ खिलीं चारों तरफ़ ! मरहबा मरहबा !महकी फ़ज़ा चारों तरफ़ ! मरहबा मरहबा !भीनी हवा चारों तरफ़ ! मरहबा मरहबा !ज़िक्र-ए-नबी चारों तरफ़ ! मरहबा मरहबा !जश्न-ए-नबी चारों तरफ़ ! मरहबा मरहबा !

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।