नात लिरिक्स

Ammi Sach Kehti Hai Ramzan Sa Mahina Koi Nahin

अम्मी सच कहती है रमज़ाँ सा महीना कोई नहीं

शायर: अल्लामा निसार अली उजागरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मेरी अम्मी, प्यारी अम्मी सच कहती हैमेरी अम्मी, प्यारी अम्मी सच कहती है

अम्मी सच कहती है रमज़ाँ सा महीना कोई नहींबारह माह में इस जैसा रहमत का महीना कोई नहीं

अम्मी सच कहती है रमज़ाँ सा महीना कोई नहीं

सहरी की रौनक़ क्या कहना, इफ़्तार का मंज़र क्या कहनामौला से दु'आएँ माँगी है, अल्लाहु अकबर क्या कहना

अम्मी सच कहती है रमज़ाँ सा महीना कोई नहीं

छोटा सा इक बच्चा हूँ, फिर भी रोज़े रखता हूँरहम-ओ-करम का तालिब हूँ, पाँचों नमाज़ें पढ़ता हूँ

अम्मी सच कहती है रमज़ाँ सा महीना कोई नहीं

है ढाल जहन्नम से रोज़ा, जन्नत का रस्ता है रोज़ामालिक भी राज़ी होता है, ईमान का रिश्ता है रोज़ा

अम्मी सच कहती है रमज़ाँ सा महीना कोई नहीं

शुक्र, उजागर ! है रब का, छोटे-बड़े सब आए हैंरोज़ा-कुशाई है मेरी, तोहफ़े भी सब लाए हैं

अम्मी सच कहती है रमज़ाँ सा महीना कोई नहीं

मेरी अम्मी, प्यारी अम्मी सच कहती हैमेरी अम्मी, प्यारी अम्मी सच कहती है

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।