नात लिरिक्स

Koi Saleeqa Hai Aarzoo Ka Na Bandagi Meri Bandagi Hai | Ye Sab Tumhara Karam Hai Aaqa

कोई सलीक़ा है आरज़ू का न बंदगी मेरी बंदगी है | ये सब तुम्हारा करम है आक़ा

नात ख़्वान: अल्हाज ख़ुर्शीद अहमदशायर: ख़ालिद महमूद ख़ालिद नक़्शबंदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

कोई सलीक़ा है आरज़ू का, न बंदगी मेरी बंदगी हैये सब तुम्हारा करम है, आक़ा ! कि बात अब तक बनी हुई है

किसी का एहसान क्यूँ उठाएँ, किसी को हालात क्यूँ बताएँतुम्हीं से माँगेंगे तुम ही दोगे, तुम्हारे दर से ही लौ लगी है

तजल्लियों के कफ़ील तुम हो, मुराद-ए-क़ल्ब-ए-ख़लील तुम होख़ुदा की रौशन दलील तुम हो, ये सब तुम्हारी ही रौशनी है

तुम्हीं हो रूह-ए-रवान-ए-हस्ती, सुकूँ नज़र का दिलों की मस्तीहै दो जहाँ की बहार तुम से, तुम्हीं से फूलों में ताज़गी है

शु'ऊर-ओ-फ़िक्र-ओ-नज़र के दा'वे, हद-ए-त'अय्युन से बढ़ न पाएन छू सके उन बुलंदियों को, जहाँ मक़ाम-ए-मुहम्मदी है

नज़र-नज़र रहमत-ए-सरापा, अदा-अदा ग़ैरत-ए-मसीहाज़मीर मुर्दा भी जी उठे हैं, जिधर तुम्हारी नज़र उठी है

'अमल की मेरे असास क्या है, ब-जुज़ नदामत के पास क्या हैरहे सलामत तुम्हारी निस्बत, मेरा तो इक आसरा यही है

'अता किया मुझ को दर्द-ए-उल्फ़त, कहाँ थी ये पुर-ख़ता की क़िस्मतमैं इस करम के कहाँ था क़ाबिल, हुज़ूर की बंदा-परवरी है

उन्ही के दर से ख़ुदा मिला है, उन्हीं से उस का पता चला हैवो आईना जो ख़ुदा-नुमा है, जमाल-ए-हुस्न-ए-हुज़ूर ही है

बशीर कहिए नज़ीर कहिए, इन्हें सिराज-ए-मुनीर कहिएजो सर-ब-सर है कलाम-ए-रब्बी, वो मेरे आक़ा की ज़िंदगी है

सना-ए-महबूब-ए-हक़ के क़ुर्बां, सुरूर-ए-जाँ का यही है 'उनवाँहर एक मस्ती फ़ना-ब-दामाँ, ये कैफ़ ही कैफ़-ए-सरमदी है

हम अपने आ'माल जानते हैं, हम अपनी निस्बत से कुछ नहीं हैंतुम्हारे दर की 'अज़ीम निस्बत मता'-ए-'अज़मत बनी हुई है

यही है ख़ालिद ! असास-ए-रहमत, यही है ख़ालिद ! बिना-ए-'अज़मतनबी का 'इरफ़ान ज़िंदगी है, नबी का 'इरफ़ान बंदगी है

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