नात लिरिक्स

Gham Sabhi Raahat-o-Taskeen Mein Dhal Jaate Hain

ग़म सभी राहत-ओ-तस्कीन में ढल जाते हैं

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरी - असद रज़ा अत्तारीशायर: ख़ालिद महमूद ख़ालिद नक़्शबंदीउपलब्ध: हिंदी

ग़म सभी राहत-ओ-तस्कीन में ढल जाते हैंजब करम होता है, हालात बदल जाते हैं

उन की रहमत है ख़ता-पोश गुनहगारों कीखोटे सिक्के सर-ए-बाज़ार भी चल जाते हैं

इस्म-ए-अहमद का वज़ीफ़ा है हर इक ग़म का 'इलाजलाख ख़तरे हों, इसी नाम से टल जाते हैं

आप के ज़िक्र से इक कैफ़ मिला करता हैऔर जितने भी हैं असरार वो खुल जाते हैं

अपनी आग़ोश में ले लेता है जब उन का करमज़िंदगी के सभी अंदाज़ बदल जाते हैं

रख ही लेते हैं भरम, उन के करम के सदक़ेजब किसी बात पे दीवाने मचल जाते हैं

दम निकल जाए तेरी याद में, फिर हम भी कहेंलिल्लाहिल-हम्द ! लिए हुस्न-ए-'अमल जाते हैं

आ पड़े हैं तेरे क़दमों में ये सुन कर हम भीजो तेरे क़दमों पे गिरते हैं, सँभल जाते हैं

कोई देखे तो ज़रा, उन की दुहाई दे कर'इश्क़ सादिक़ हो तो पत्थर भी पिगल जाते हैं

आप को का'बा-ए-मक़्सूद ही मानो, ख़ालिद !आप के दर पे सब अरमान निकल जाते हैं

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