नात लिरिक्स

Khak Suraj Se Andheron Ka Izala Hoga | Aap Aaen To Mere Ghar Mein Ujala Hoga

ख़ाक सूरज से अँधेरों का इज़ाला होगा | आप आएँ तो मेरे घर में उजाला होगा

नात ख़्वान: मीलाद रज़ा क़ादरीशायर: ख़ालिद महमूद ख़ालिद नक़्शबंदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ख़ाक सूरज से अँधेरों का इज़ाला होगाआप आएँ तो मेरे घर में उजाला होगा

हश्र में उन का हर इक चाहने वाला होगामेरे सरकार का 'आलम ही निराला होगा

हश्र में होगा वो सरकार के झंडे के तलेमेरे सरकार का जो चाहने वाला होगा

'इश्क़-ए-सरकार की इक शम'अ जला लो दिल मेंबा'द मरने के लहद में भी उजाला होगा

आ नहीं सकता नज़र जल्वा-ए-सरकार कभीबे-यक़ीनी का अगर आँख में जाला होगा

कल वो सरकार के दामन में नज़र आएगाजिस के 'ऐबों को ज़माने ने उछाला होगा

जब भी माँगो तो वसीले से उन्हीं के माँगोइस वसीले से करम और दो-बाला होगा

हश्र में उस को भी सीने से लगाएँगे हुज़ूरजिस गुनहगार को हर एक ने टाला होगा

होगा सैराब सर-ए-कौसर-ओ-तसनीम वहीजिस के हाथों में मदीने का पियाला होगा

हर ज़रुरत पे कफ़ालत की नज़र है तेरीऔर तुझ सा न कोई पालने वाला होगा

माह-ए-तयबा की तजल्ली भी निराली होगीआप के गिर्द भी असहाब का हाला होगा

सिला-ए-ना'त-ए-नबी पाउँगा जिस दिन, ख़ालिद !वो करम देखना तुम देखने वाला होगा

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