नात लिरिक्स

Chhoote Na Kabhi Tera Daman Ya Khwaja Muinuddin Hasan

छूटे न कभी तेरा दामन या ख़्वाजा मुईनुद्दीन हसन

नात ख़्वान: मीलाद रज़ा क़ादरीशायर: सय्यिद नूरानी मियाँ अशरफ़ अशरफ़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

छूटे न कभी तेरा दामन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !है तुम पे फ़िदा सब तन-मन-धन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !

छूटे न कभी तेरा दामन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !करते हैं फ़िदा सब तन-मन-धन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !

अजमेर मुझे पहुँचा दे ख़ुदा, चादर मैं चढ़ाऊँ फूलों कीफिर सदक़ा करूँ अपना तन-मन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !

आक़ा की 'अता, हो नूर-ए-'अली, ज़हरा की कली, वलियों के वलीहसनैन के दिल, 'उस्माँ के नयन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !

का'बा हो, मदीना हो या नजफ़, हर जा पे नज़र तुम आते होकुछ ऐसी लगी है दिल की लगन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !

मय-ख़ाने में मेरी मस्ती कुछ इस तरह नज़र आए, साक़ी !मैं रक़्स करूँ और हो छन-छन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !

दरबार में मैं ऐसे आऊँ, सब हाल मेरे मस्तूर रहेंऔर बात करूँ मैं मन ही मन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !

थक हार के मैं पहुँचा दर पे, आराम मिला जब आप मिलेऔर लगने लगा फिर अपनापन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !

ऐ पैकर-ए-जूद-ओ-सख़ा ख़्वाजा ! अग़्यार न क्यूँ हैरान रहेंजब रहमत-ए-'आलम साया-फ़िगन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !

ये मस्त-निगाही है, ख़्वाजा ! जो मस्त-ओ-मलंग बनाती हैदरबार में हो आज़ाद चलन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !

अजमेर की धरती पे चलना आसान नहीं यूँ बोल उठीऐ नूर ! तेरे दिल की धड़कन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !

अब नूर तेरे दर पे आ के इज़हार-ए-'अक़ीदत कैसे करेखाए है उसे बस ये उलझन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !

इस सर को झुका पाए दुश्मन, ये उस के बस की बात नहींजिस पर हो तेरे क़दमों की मुहर, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !

फ़रज़ंद-ए-'अली हो नूर-ए-नबी, महबूब-ए-ख़ुदा है ज़ात तेरीइक बार दिखा अपना गुलशन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !

जो कुछ भी मिला है अशरफ़ को, वो तेरे दर का उतरन हैबस यूँही रहे साया सर पर, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !

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