नात लिरिक्स

Dil Mein Ishq-e-Nabi Ki Ho Aisi Lagan

दिल में इश्क़-ए-नबी की हो ऐसी लगन

नात ख़्वान: मीलाद रज़ा क़ादरीशायर: अल्लामा साइम चिश्तीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

दिल में 'इश्क़-ए-नबी की हो ऐसी लगनरूह तड़पती रहे, दिल मचलता रहेज़िंदगी का मज़ा है कि हर साँस सेया मुहम्मद मुहम्मद निकलता रहे

दिल में 'इश्क़-ए-नबी की हो ऐसी लगनरूह तड़पती रहे, दिल मचलता रहे

या मुहम्मद मुहम्मद मैं कहता रहानूर के मोतियों की लड़ी बन गईआयतों से मिलाता रहा आयतेंफिर जो देखा तो ना'त-ए-नबी बन गई

दिल में 'इश्क़-ए-नबी की हो ऐसी लगनरूह तड़पती रहे, दिल मचलता रहे

जो भी आँसू बहे मेरे महबूब केसब के सब अब्र-ए-रहमत के छींटे बनेछा गई रात जब ज़ुल्फ़ लहरा गईजब तबस्सुम किया चाँदनी बन गई

दिल में 'इश्क़-ए-नबी की हो ऐसी लगनरूह तड़पती रहे, दिल मचलता रहे

ये तो माना कि जन्नत है बाग़-ए-हसींख़ूबसूरत है सब ख़ुल्द की सर-ज़मींहुस्न-ए-जन्नत को फिर जब समेटा गयासरवर-ए-अंबिया की गली बन गई

दिल में 'इश्क़-ए-नबी की हो ऐसी लगनरूह तड़पती रहे, दिल मचलता रहे

जब छिड़ा तज़्किरा उन के रुख़्सार कावद्दुहा पढ़ लिया, वल-क़मर कह दियाआयतों की तिलावत भी होती रहीना'त भी हो गई, बात भी बन गई

दिल में 'इश्क़-ए-नबी की हो ऐसी लगनरूह तड़पती रहे, दिल मचलता रहे

सब से साइम ज़माने में मा'ज़ूर थासब से बेकस था, बेबस था, मजबूर थाउन को रहम आ गया मेरे हालात परमेरी 'अज़मत मेरी बेबसी बन गई

दिल में 'इश्क़-ए-नबी की हो ऐसी लगनरूह तड़पती रहे, दिल मचलता रहे

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