नात लिरिक्स

Chaand Taare Hi Kya Dekhte Rah Gae

चाँद तारे ही क्या देखते रह गए

नात ख़्वान: मीलाद रज़ा क़ादरीशायर: पीर नसीरुद्दीन नसीरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

चाँद तारे ही क्या देखते रह गएउन को अर्ज़-ओ-समा देखते रह गए

चाँद तारे ही क्या देखते रह गए

पढ़ के रूहुल-अमीं सूर-ए-वद्दुहासूरत-ए-मुस्तफ़ा देखते रह गए

उन को अर्ज़-ओ-समा देखते रह गए

चाँद तारे ही क्या देखते रह गए

वो इमामत की शब, वो सफ़-ए-अम्बियामुक़्तदी, मुक़्तदा देखते रह गए

उन को अर्ज़-ओ-समा देखते रह गए

चाँद तारे ही क्या देखते रह गए

वो गए अर्श तक, और रूहुल-अमींसिदरतुल-मुंतहा देखते रह गए

उन को अर्ज़-ओ-समा देखते रह गए

चाँद तारे ही क्या देखते रह गए

क्या ख़बर ! किस को कब जाम-ए-कौसर मिलाहम तो उन की अदा देखते रह गए

उन को अर्ज़-ओ-समा देखते रह गए

चाँद तारे ही क्या देखते रह गए

नेक-ओ-बद पर हुवा उन का यकसाँ करमलोग अच्छा-बुरा देखते रह गए

उन को अर्ज़-ओ-समा देखते रह गए

चाँद तारे ही क्या देखते रह गए

हो के गुम, ए नसीर ! उन के जल्वों में हमशान-ए-रब्बुल-'उला देखते रह गए

उन को अर्ज़-ओ-समा देखते रह गए

चाँद तारे ही क्या देखते रह गए

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